- भारत ने UNSC 2028-29 के लिए औपचारिक अभियान शुरू किया।
- जयशंकर ने UN महासचिव से वैश्विक संकटों पर चर्चा की।
- SHANTI फ्रेमवर्क के तहत 6 प्राथमिकताओं को रखा गया।
- अगर चुना गया, तो भारत का UNSC में 9वां कार्यकाल होगा।
समग्र समाचार सेवा
न्यूयॉर्क 14 जुलाई :विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से न्यूयॉर्क में मुलाकात की, जहां दोनों के बीच पश्चिम एशिया, यूक्रेन और सूडान समेत कई अहम वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। यह मुलाकात भारत द्वारा 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता के लिए अपना अभियान शुरू करने के मौके पर हुई।
जयशंकर ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “न्यूयॉर्क में UN महासचिव @antonioguterres से मिलकर खुशी हुई। वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा की, जिसमें पश्चिम एशिया, यूक्रेन और सूडान शामिल हैं। भारत-UN सहयोग की मजबूती को भी सराहा।”
इस दौरान जयशंकर ने भारत के UNSC अभियान के लिए SHANTI (Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity) नामक 6 सूत्रीय विजन भी पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत सुरक्षा परिषद में ग्लोबल साउथ की आवाज बनेगा और विकासशील देशों के हितों की रक्षा करेगा।
जयशंकर ने कहा कि भारत संवाद, सहयोग और सुधारों के जरिए समसामयिक वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करेगा। भारत महिलाओं, शांति और सुरक्षा एजेंडा को भी आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
यदि भारत चुनाव जीतता है, तो यह सुरक्षा परिषद में उसका 9वां कार्यकाल होगा। भारत स्थायी सदस्यता की अपनी मांग के साथ-साथ अस्थायी सीट के जरिए वैश्विक शांति और सुरक्षा में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है।
भारत के SHANTI फ्रेमवर्क की 6 प्रमुख प्राथमिकताएं:
- वैश्विक शांति-सुरक्षा में ग्लोबल साउथ की भूमिका मजबूत करना।
- लोकतांत्रिक, प्रतिनिधि और प्रभावी बहुपक्षीय व्यवस्था को बढ़ावा देना।
- उन्नत तकनीक के साथ भविष्य-तैयार शांति-रक्षक ढांचा बनाना।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में मानव केंद्रित दृष्टिकोण को बढ़ावा देना।
- अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप स्वतंत्र, खुली समुद्री व्यवस्था का समर्थन।
- आतंकवाद और टेरर फाइनेंसिंग से निपटने के लिए वैश्विक प्रयास तेज करना।
जयशंकर ने कहा कि भारत संवाद, सहयोग और सुधारों के जरिए समसामयिक वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करेगा। भारत महिलाओं, शांति और सुरक्षा एजेंडा को भी आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
यदि भारत चुनाव जीतता है, तो यह सुरक्षा परिषद में उसका 9वां कार्यकाल होगा। भारत स्थायी सदस्यता की अपनी मांग के साथ-साथ अस्थायी सीट के जरिए वैश्विक शांति और सुरक्षा में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है।
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