शाही मस्जिद मामला: MP हाईकोर्ट ने दिए आदेश
मस्जिद समिति और नगर निगम के बीच समझौते के बाद हाईकोर्ट ने निबटाई अपील, स्पष्ट किया कि प्रशासन के सभी आश्वासन रहेंगे बाध्यकारी।
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने उज्जैन की ऐतिहासिक शाही मस्जिद के सड़क चौड़ीकरण मामले से जुड़ी अपीलों को आपसी समझौते के बाद निबटा दिया है।
- अदालत ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम द्वारा अपने जवाब और नोटिस में दिए गए सभी आश्वासन और शर्तें नगर निगम पर पूरी तरह बाध्यकारी होंगे।
- मस्जिद समिति और प्रशासन के बीच हुए समझौते के तहत सड़क के दायरे में आने वाले कुछ हिस्सों और अतिक्रमण को स्वेच्छा से हटाने पर सहमति बनी है।
नई दिल्ली, 28 सितंबर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर खंडपीठ ने उज्जैन की ऐतिहासिक शाही मस्जिद (Shahi Masjid) के आंशिक निष्कासन और सड़क चौड़ीकरण विवाद से जुड़े मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने मस्जिद कमेटी और स्थानीय प्रशासन के बीच हुए आपसी समझौते को रिकॉर्ड पर लेते हुए इससे संबंधित अपीलों को निबटा दिया है। इस फैसले के बाद उज्जैन में चल रहे सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने के प्रोजेक्ट को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है, जिससे प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर राहत की सांस ली गई है।
अदालत ने स्पष्ट किए नगर निगम के उत्तरदायित्व
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि दोनों पक्षों (मस्जिद कमेटी और नगर निगम) के बीच आपसी सहमति बन चुकी है, फिर भी यह आवश्यक है कि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे। बेंच ने अपने आदेश में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि उज्जैन नगर निगम द्वारा अपने जवाब और पूर्व में जारी किए गए नोटिस में जो भी आश्वासन दिए गए हैं, वे पूरी तरह से निगम पर बाध्यकारी होंगे। इसका अर्थ यह है कि सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आने वाली संरचनाओं को हटाने के एवज में प्रशासन और निगम को अपने वादों का सख्ती से पालन करना होगा, जिसमें प्रभावित हिस्सों का मुआवजा, वैकल्पिक व्यवस्था या अन्य शर्तें शामिल हैं।
आपसी समझौते से सुलझा विवाद, सड़क चौड़ीकरण को गति
गौरतलब है कि उज्जैन में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और सड़कों के चौड़ीकरण के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई थी। शुरुआत में इसे लेकर कुछ असहजता और स्थानीय स्तर पर विरोध देखने को मिला था, लेकिन बाद में सूझबूझ का परिचय देते हुए मस्जिद प्रबंधन समिति और स्थानीय प्रशासन ने बातचीत के जरिए इसका सौहार्दपूर्ण समाधान निकाल लिया। समझौते के तहत मस्जिद समिति ने खुद आगे आकर सड़क की चौड़ाई के दायरे में आ रहे निर्धारित हिस्से को हटाने में सहयोग करने का निर्णय लिया। कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस आदेश से शहर में विकास कार्यों और धार्मिक सौहार्द के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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