सुप्रीम कोर्ट: अम्युनिशन लॉग सुरक्षित रखें

    • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को RAF के पेलेट गन हथियार रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया
    • याचिका में भीड़ नियंत्रण में पेलेट गन के इस्तेमाल पर पाबंदी की मांग
    • संयुक्त राष्ट्र दिशानिर्देशों और संवैधानिक कसौटी का हवाला
    • 20 जुलाई को जंतर मंतर पर घायल हुए युवाओं ने दायर की याचिका
    • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली | 30 जुलाई :
    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया है कि जंतर मंतर प्रदर्शन के दौरान तैनात RAF (रैपिड एक्शन फोर्स) के पेलेट गन के हथियार और एम्युनिशन लॉग को सुरक्षित रखा जाए। यह निर्देश पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और पेलेट गन से घायल दो युवाओं की याचिका पर दिया गया, जिसमें भीड़-कंट्रोल के लिए पेलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भले ही पेलेट गन को ‘कम घातक’ या ‘गैर-घातक’ हथियार बताया जाता है, लेकिन भीड़ पर नजदीक से चलाने पर यह गंभीर या जानलेवा चोटें पहुंचा सकता है—खासकर आंखों और अन्य संवेदनशील अंगों को। 20 जुलाई की ‘संसद चलो’ रैली के दौरान 19 वर्षीय साहिल लोचब की आंख में आई गंभीर चोट को याचिकाकर्ताओं ने इसका उदाहरण बताया।

    याचिका में संयुक्त राष्ट्र के ‘कम घातक हथियार उपयोग’ दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि भीड़ नियंत्रण में ऐसे हथियारों का प्रयोग ‘आवश्यकता, समानुपातिकता और तर्कसंगतता’ की संवैधानिक कसौटी पर खरा नहीं उतरता।

    याचिकाकर्ता कलाकार प्रशांत कुमार सिंह (25) ने भी आरोप लगाया कि 20 जुलाई की ‘चलों संसद’ रैली में RAF द्वारा पेलेट गन से घायल किया गया, जबकि उनकी ओर से कोई उकसावे या हिंसा नहीं थी। एक अन्य याचिकाकर्ता शेख इरशाद मंसूरी (26) ने दावा किया कि वे कनॉट प्लेस में वीजा संबंधी काम के बाद थे और पेलेट गन फायरिंग में घायल हो गए।

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