बच्चों को सोशल मीडिया के खतरों से बचाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

  • सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा संबंधी जनहित याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया।

  • साइबर बुलिंग, यौन शोषण और हानिकारक सामग्री पर चिंता।

  • बच्चों के लिए प्रभावी सोशल मीडिया नियमन की मांग।

  • डिजिटल कंपनियों की जवाबदेही और अभिभावकों की भूमिका चर्चा में।

समग्र समाचार सेवा 

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर : सर्वोच्च न्यायालय ने बच्चों को सोशल मीडिया के संभावित खतरों से सुरक्षित रखने के लिए नियामक व्यवस्था विकसित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

शुक्रवार को हुई सुनवाई में अदालत के समक्ष बच्चों के साइबर बुलिंग, ऑनलाइन यौन शोषण और हानिकारक डिजिटल सामग्री के संपर्क में आने जैसी चिंताएं रखी गईं।

केवल आयु सीमा पर्याप्त नहीं

याचिका में ऐसे नियमों की आवश्यकता बताई गई है जिन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

बच्चों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा की चुनौती केवल आयु सत्यापन तक सीमित नहीं है। इसमें व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, अजनबियों से संपर्क, आपत्तिजनक सामग्री और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से जुड़े जोखिम भी शामिल हैं।

डिजिटल कंपनियों की जिम्मेदारी

सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक महत्त्वपूर्ण नियामक विषय बनता जा रहा है।

भारत में भी यह प्रश्न उठ रहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में कितनी जिम्मेदारी निभाते हैं और उनकी नीतियों की स्वतंत्र समीक्षा किस प्रकार की जाए।

अधिकारों और सुरक्षा के बीच संतुलन

किसी भी नियामक व्यवस्था को बच्चों की सुरक्षा के साथ शिक्षा, जानकारी तक पहुंच और अभिव्यक्ति जैसे अधिकारों का भी ध्यान रखना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोई अंतिम नियामक व्यवस्था निर्धारित नहीं की गई है। आगे की सुनवाई इस विषय पर सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट कर सकती है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.