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वसुधैव कुटुंबकम्

भारतीय समावेशी समाज पर आधुनिकता की काली छाया

✍🏻 पार्थसारथि थपलियाल माना कि परिवर्तन अवश्यंभावी है, नदी के पानी में नहाते हुए स्पर्श होते ही पानी वही नहीं रह जाता जिसने अभी स्पर्श किया था। यह प्रवाह का परिवर्तन है। तालाब के पानी में ऐसा परिवर्तन नहीं होता। एक परिवर्तन बाँध वाले पानी…

भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रासंगिकता: ब्रिक्स 2026

      डॉ. प्रियदर्शिनी पुरोहित  नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और वैश्विक विखंडन से जूझ रही है। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता…