ट्रंप का बयान: ईरान-इजरायल संघर्ष में युद्धविराम ‘बहुत मुश्किल’

समग्र समाचार सेवा
वाशिंगटन, 21 जून: ईरान और इजरायल के बीच जारी तीव्र संघर्ष के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की संभावना को लेकर गहरी शंका जताई है। शनिवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि “जब आप ईरान पर इजरायल के हमले देख रहे हों, तो इसे रोकना बहुत मुश्किल हो सकता है।” ट्रंप के इस बयान से पहले व्हाइट हाउस ने संकेत दिए थे कि दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बन रही है।

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह युद्धविराम के पक्षधर हैं, लेकिन मौजूदा हालात में इजरायल को हमले रोकने के लिए कहना आसान नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर कोई जीत रहा हो, तो उसे रोकना हारने वाले को रोकने की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होता है।”

व्हाइट हाउस ने जताई थी बातचीत की उम्मीद

ट्रंप के इस रुख से पहले व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया था कि अमेरिका को संघर्ष के बीच बातचीत की पर्याप्त संभावना दिख रही है। अमेरिका यह तय करने के लिए अतिरिक्त समय ले रहा है कि क्या उसे सैन्य हस्तक्षेप करना चाहिए या कूटनीतिक माध्यमों से समाधान की दिशा में बढ़ना चाहिए।

हालांकि ट्रंप के बयान ने एक बार फिर इस मुद्दे पर अमेरिका की नीति को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।

खुफिया निदेशक से असहमति जताई

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक और अहम मोर्चे पर विवाद खड़ा कर दिया जब उन्होंने अपने ही राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गैबार्ड की राय को खारिज कर दिया। गैबार्ड ने कहा था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक ईरान इस समय परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा है। ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी, “तो फिर मेरा खुफिया समुदाय गलत है। गैबार्ड गलत हैं।”

उनका यह बयान अमेरिका की आंतरिक नीति और खुफिया तंत्र को लेकर गहराती मतभिन्नताओं की ओर इशारा करता है, खासकर तब जब मध्य पूर्व एक बड़े युद्ध की दहलीज पर खड़ा है।

 

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