समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 8 अगस्त: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान कर एक बार फिर से वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। यह कदम उन्होंने ट्रेड डील के लिए भारत पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया है, लेकिन विडंबना यह है कि उनके अपने देश में भी इस फैसले का जोरदार विरोध हो रहा है।
अमेरिकी सियासत में विरोध की गूंज
अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट्स ने इस फैसले को भारत-अमेरिका संबंधों के लिए खतरा बताया है। उनका कहना है कि दशकों से बनाए गए रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को इस तरह के कदम से नुकसान होगा।
अमेरिकी रिप्रजेंटेटिव ग्रेगरी मीक्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा—
“ट्रंप का टैरिफ टैन्ट्रम, अमेरिका-भारत की साझेदारी को मजबूत करने के वर्षों के प्रयासों को खतरे में डाल रहा है।”
लोकतांत्रिक मूल्यों का हवाला
डेमोक्रेट्स का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच गहरे रणनीतिक, आर्थिक और जन-से-जन संबंध हैं। किसी भी व्यापारिक या राजनीतिक चिंता का समाधान लोकतांत्रिक मूल्यों और पारस्परिक सम्मान के साथ किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि एकतरफा आर्थिक दबाव न केवल रिश्तों को बिगाड़ता है, बल्कि व्यापारिक भरोसे को भी कमजोर करता है।
टैरिफ लागू करने की समयसीमा
ट्रंप द्वारा घोषित 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ 7 अगस्त से लागू हो चुका है। इसके साथ ही अगले 21 दिनों में अतिरिक्त 25 फीसदी शुल्क और जोड़ा जाएगा, जिससे कुल टैरिफ 50 फीसदी हो जाएगा।
ट्रंप का साफ कहना है कि जब तक टैरिफ विवाद का समाधान नहीं होता, भारत के साथ किसी ट्रेड डील पर बात नहीं होगी।
भारत का सख्त रुख
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी आर्थिक दबाव के आगे झुकेगा नहीं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि देश के आर्थिक हित और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा और आवश्यकता पड़ने पर हर संभव कदम उठाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब वैकल्पिक बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकता है, जिससे अमेरिकी दबाव का असर कम हो।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर असर
भारत और अमेरिका के बीच सालाना 150 अरब डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार होता है। इस टैरिफ युद्ध से टेक्सटाइल, स्टील, आईटी सेवाओं और कृषि उत्पादों के निर्यात पर सीधा असर पड़ सकता है।
व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर विवाद जल्द सुलझा नहीं तो दोनों देशों की कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है और उपभोक्ताओं पर भी महंगाई का बोझ बढ़ेगा।
ट्रंप का यह टैरिफ निर्णय न केवल एक आर्थिक चुनौती है, बल्कि भारत-अमेरिका के वर्षों पुराने भरोसे और साझेदारी की भी परीक्षा है। आने वाले हफ्तों में यह देखना होगा कि क्या दोनों देश इस विवाद को बातचीत से सुलझा पाते हैं या फिर यह ट्रेड वॉर और गहराता है।
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