- विश्वमांगल्य सभा की उत्तर भारत प्रबोधन बैठक 23–24 जुलाई को दिल्ली के विश्व युवक केंद्र, चाणक्यपुरी में आयोजित होगी।
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत “मातृत्व विमर्श” विषय पर देश की प्रबुद्ध महिलाओं से विशेष संवाद करेंगे।
- दिल्ली कार्यक्रम में 19 राज्यों सहित 280 प्रतिनिधि महिलाएं और अंबेडकर भवन जनपथ में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में 700–800 महिलाओं की सहभागिता अपेक्षित है।
- संगठन के 33 प्रांतों में सक्रियता, 6 लाख सदस्य और देशभर में विविध महिला सशक्तिकरण उपक्रमों पर जोर रहेगा।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 16 जुलाई: विश्वमांगल्य सभा की राष्ट्रीय संगठन मंत्री वृषाली जोशी ने आज आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि विश्वमांगल्य सभा की स्थापना 19 जनवरी 2010 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुई।विश्वमांगल्य सभा पिछले 16 वर्षों से मातृशक्ति के सशक्तिकरण, परिवार एवं सामाजिक जागरण के क्षेत्र में कार्यरत एक राष्ट्रव्यापी संगठन है। संगठन का मूल ध्येयवाक्य “न मातु : पर देवतम” अर्थात “माँ से बढ़कर कोई दैवत नहीं” है। उन्होंने बताया कि संगठन के संस्थापक परम पूजनीय श्रीनाथ पीठाधीश्वर, अनंत श्री विभूषित आचार्य स्वामी श्री जीतेंद्रनाथ जी महाराज,देवनाथ पीठ अंजनगावसुर्जी, जिल्हा अमरावती, महाराष्ट्र है ।
महिला अधिवेशन आयोजित
संगठन के राष्ट्रीय मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक मा. श्री प्रशांत हरतालकर और पालक स्वरूप सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत हैं, जो प्रत्येक वर्ष संगठन के वार्षिक मार्गदर्शन हेतु समय प्रदान करते हैं। डॉ.वृषाली जोशी ने स्पष्ट किया कि ”विश्वमांगल्य सभा यह महिलाओं के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक कार्य करने वाला स्वतंत्र संगठन है।” विश्व मांगल्य सभा मातृशक्ति के बीच कार्य करते हुए समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में संगठन का कार्य देश के 33 प्रांतों में चल रहा है।3500 दायित्वधारी कार्यकर्ता एवं 6 लाख महिलाएं इस संगठन से जुड़ी है। हाल ही में दिल्ली सहित 23 प्रांतों में महिला अधिवेशन आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 35 हजार महिलाओं की सहभागिता रही।
युगानुकूल मातृत्व (Contemporary Motherhood)
इन संवादों के आधार पर संगठन ने आगामी वर्षों के लिए “युगानुकूल मातृत्व (Contemporary Motherhood)” इस विषय पर विविध उपक्रमों द्वारा कार्य करने का तय किया है। इस वर्ष की बैठक की विशेषता वृषाली जोशी ने बताया कि इस वर्ष पहली बार डॉ. मोहन भागवत ने मातृत्व के इस महत्त्वपूर्ण विषय पर देश की प्रबुद्ध महिलाओं के सामने विशेष व्याख्यान तथा चर्चा करने का तय किया है।उनका एक व्याख्यान दिल्ली के प्रतिष्ठित डॉ अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में और एक व्याख्यान दक्षिण भारत के हैदराबाद स्थित सेवालाल बंजारा भवन में होगा। उत्तर भारत की प्रबोधन बैठक 23 एवं 24 जुलाई को विश्व युवक केंद्र, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में आयोजित होगी, जबकि दक्षिण भारत की बैठक 25-26 जुलाई को हैदराबाद में संपन्न होगी। । 24 जुलाई को अंबेडकर भवन में विशेष कार्यक्रम उन्होंने बताया कि 24 जुलाई को पूर्वाह्न में विश्व युवक केंद्र में डॉ. मोहन भागवत के साथ कार्यकर्ता बैठक एवं प्रबोधन सत्र आयोजित होगा।
इसके पश्चात सायं 5:00 बजे, अंबेडकर भवन, जनपथ, नई दिल्ली में देश की प्रबुद्ध मातृशक्ति के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। हाई-टी के साथ प्रारंभ होने वाला यह कार्यक्रम लगभग दो से ढाई घंटे तक चलेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में यह कार्यक्रम विशेष रूप से ऐतिहासिक है। संघ के अब तक के पाँचों सरसंघचालकों के कार्यकाल में पहली बार ऐसा अवसर होगा जब सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत देश की प्रबुद्ध मातृशक्ति के साथ “मातृत्व विमर्श” विषय पर विस्तृत संवाद करेंगे। इस सत्र में प्रश्नोत्तर का भी विशेष आयोजन रहेगा।
700 से 800 महिलाओं की उपस्थिति का अनुमान
अंबेडकर भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में दिल्ली सहित उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से 700 से 800 महिलाओं की उपस्थिति का अनुमान है, जबकि हैदराबाद में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 1,300 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। मीडिया के लिए अवसर विश्व मांगल्य सभा ने मीडिया प्रतिनिधियों से बताया है कि वे 24 जुलाई को अंबेडकर भवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम के कवरेज हेतु उपस्थित रहें। साथ ही, 24 जुलाई प्रातः 9:30 बजे विश्व युवक केंद्र में डॉ. मोहन भागवत के साथ होने वाले समापन सत्र के प्रारंभ में मीडिया प्रतिनिधियों को फोटो-ऑप का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक सम्पन्न होने के पश्चात संगठन साल भर की कार्ययोजना एवं बैठक के प्रमुख निष्कर्षों की जानकारी मीडिया के साथ साझा करेगा
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.