यासिन मलिक पर कसेगा शिकंजा, दिल्ली कोर्ट का PMLA चार्ज का आदेश
टेरर फंडिंग और हवाला के जरिए विदेशी धन जुटाने के मामले में विशेष एनआईए अदालत ने तय किए आरोप, 8.94 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन का है मामला।
- दिल्ली की एक विशेष एनआईए अदालत ने टेरर फंडिंग और हवाला मामले में अलगाववादी नेता यासिन मलिक और छह अन्य के खिलाफ PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है।
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, आरोपियों ने पाकिस्तानी संस्थाओं और अन्य माध्यमों से लगभग 8.94 करोड़ रुपये के अपराध की आय (Proceeds of Crime) प्राप्त की थी।
- अदालत ने कहा है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ पुख्ता संदेह पैदा करती है, जिसके बाद अब मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर: देश की राजधानी नई दिल्ली से राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Funding) से जुड़े एक बड़े मामले में महत्वपूर्ण कानूनी अपडेट सामने आया है। दिल्ली की एक विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अदालत ने अलगाववादी नेता यासिन मलिक (Yasin Malik) और छह अन्य आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया है। विशेष एनआईए जज ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि उपलब्ध दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर प्रथम दृष्टया सभी सात आरोपियों के खिलाफ गंभीर संलिप्तता का पर्याप्त संदेह बनता है।
क्या हैं प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आरोप?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर मामले के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क के तहत लगभग 8,94,87,639 रुपये की ‘अपराध की आय’ (Proceeds of Crime) उत्पन्न की गई और उसे विभिन्न हवाला चैनलों व अन्य माध्यमों से प्राप्त, स्थानांतरित तथा छुपाया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह सारा पैसा पाकिस्तानी संस्थाओं और अन्य माध्यमों से भारत में अलगाववादी तथा विध्वंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भेजा गया था। अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों में यह भी सामने आया कि यासिन मलिक को विभिन्न चैनलों के जरिए कुल मिलाकर लगभग 30 लाख रुपये से अधिक की राशि कथित तौर पर अवैध रूप से प्राप्त हुई थी।
मामले की पृष्ठभूमि और आगे की कानूनी प्रक्रिया
यह पूरा मामला साल 2017 में एनआईए द्वारा दर्ज की गई मूल एफआईआर और जांच पर आधारित है, जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की गहराई से जांच के लिए ईडी ने अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाई थी। सुरक्षा संबंधी और लॉजिस्टिकल कारणों के चलते कुछ आरोपियों को अदालत में पेश नहीं किया जा सका, जिस पर अदालत ने न्यायिक हिरासत में ही औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के साथ ही मामले में कानूनी शिकंजा और अधिक कस गया है तथा अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है।
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