जापान में गूंजा बोल बम, पाँचवीं काँवर यात्रा संपन्न
टोक्यो में प्रवासी भारतीयों ने श्रद्धा के साथ निकाली काँवर यात्रा, भगवान शिव का किया जलाभिषेक।
- जापान के टोक्यो में प्रवासी भारतीयों द्वारा लगातार पाँचवें वर्ष श्रद्धा और उत्साह के साथ काँवर यात्रा का आयोजन किया गया।
- यात्रा की शुरुआत फुनाबोरी स्थित इस्कॉन हॉल में पूजा-अर्चना के बाद हुई, जहाँ श्रद्धालुओं ने राम मंदिर, इबाराकी में जलाभिषेक किया।
- इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में बच्चों, महिलाओं और युवाओं समेत विभिन्न राज्यों के प्रवासी भारतीयों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
टोक्यो,जापान: सावन के पवित्र महीने में देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सनातन संस्कृति की गूंज सुनाई दे रही है। इसी कड़ी में जापान की राजधानी टोक्यो और उसके आसपास की धरती एक बार फिर से “हर हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारों से गुंजायमान हो उठी। बिहार-झारखंड के प्रवासी भारतीय समुदाय के नेतृत्व में जापान में लगातार पाँचवें वर्ष काँवर यात्रा का बेहद भव्य, श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजन किया गया। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीयों के बीच सांस्कृतिक एकता की एक बेहतरीन मिसाल भी पेश करती है।
फुनाबोरी से शुरू हुई भव्य काँवर यात्रा
इस धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत टोक्यो के फुनाबोरी स्थित ISKCON/VCC Hall से हुई। यहाँ सबसे पहले विधिवत पवित्रीकरण और भगवान शिव की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने सुसज्जित काँवर में पवित्र गंगाजल भरकर अपनी यात्रा का शुभारंभ किया। काँवरिए पारंपरिक अंदाज में बोल बम के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े और उन्होंने राम मंदिर, सोदो, इबाराकी तक की यात्रा तय की। इस दौरान पूरे मार्ग में भक्तिमय माहौल बना रहा और प्रवासी भारतीयों ने बढ़-चढ़कर इस पवित्र यात्रा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
नई पीढ़ी का जुड़ाव और सांस्कृतिक उत्साह
इस वर्ष की काँवर यात्रा की सबसे खास और प्रेरणादायक विशेषता इसमें शामिल होने वाली हर उम्र के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों तक ने पूरे समर्पण भाव से काँवर उठाई। जापान में जन्मी और पली-बढ़ी नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन संस्कृति, सनातन परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ते देखना बेहद भावुक करने वाला क्षण था। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि समुद्र पार करने के बाद भी प्रवासी भारतीय अपनी जड़ों और संस्कृति से मजबूती से जुड़े हुए हैं।
विविधता में एकता का अनूठा संगम
पिछले पाँच वर्षों में यह काँवर यात्रा केवल एक राज्य या समुदाय तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह जापान में बसे तमाम भारतीय समुदायों का एक साझा सांस्कृतिक उत्सव बन चुकी है। इस वर्ष के आयोजन में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बंगाल और महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न कोनों से आए प्रवासी भारतीयों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। सभी ने मिलकर इस यात्रा को सफल बनाया और यह साबित कर दिया कि भाषा या क्षेत्र चाहे कोई भी हो, आस्था के धागे सभी भारतीयों को एक सूत्र में पिरोकर रखते हैं।
जन्मभूमि से दूर कर्मभूमि में संस्कृति की अलख
अपनी जन्मभूमि भारत से हजारों किलोमीटर दूर जापान जैसे विकसित देश में इस तरह की पारंपरिक यात्राओं का निरंतर आयोजन करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। इस आयोजन का मूल उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को अपनी आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाना है। यात्रा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर भगवान भोलेनाथ से संपूर्ण विश्व के कल्याण, शांति, सुख और समृद्धि के लिए प्रार्थना की और एक स्वर में यही कामना की कि “बाबा भोलेनाथ की कृपा सभी पर सदैव बनी रहे।”
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