अकी आबे ने आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय से की मुलाकात

जापान के दिवंगत प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले से मुलाकात की।

  • जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे और ‘निप्पॉन काइगी’ के अध्यक्ष तोमोहिको तानिगुच ने आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले से एक घंटे से अधिक समय तक मुलाकात की।
  • इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सभ्यतागत संबंधों, सांस्कृतिक सहयोग और जन-केंद्रित पहलों को मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई।
  • इस अवसर पर फाउंडेशन फॉर सोशल कंट्रिब्यूशन की चेयरपर्सन अकी आबे और जापानी प्रतिनिधिमंडल ने भारत के साथ आपसी संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में नए आयाम तलाशने पर सहमति व्यक्त की।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 12 अक्तूबर: भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर एक नया आयाम देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और वैचारिक मुलाकात देखने को मिली है। जापान के दिवंगत और दूरदर्शी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे ने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय में संघ के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबोले से शिष्टाचार भेंट की। इस उच्चस्तरीय बैठक में जापान के प्रमुख गैर-सरकारी संगठन ‘निप्पॉन काइगी’ के अध्यक्ष तोमोहिको तानिगुच भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। करीब एक घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक ने दोनों देशों के बीच वैचारिक और सांस्कृतिक संवाद को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया है।

सभ्यतागत रिश्तों और सांस्कृतिक सहयोग पर जोर

आरएसएस मुख्यालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु भारत और जापान के प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को पुनर्जीवित करना और उन्हें आधुनिक संदर्भ में मजबूत करना था। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और जापान के बीच केवल कूटनीतिक या आर्थिक ही नहीं, बल्कि गहरे आत्मीय और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। अकी आबे, जो कि ‘फाउंडेशन फॉर सोशल कंट्रिब्यूशन’ की चेयरपर्सन भी हैं, ने सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने दिवंगत शिंजो आबे के सपनों के अनुरूप भारत और जापान की मित्रता को और अधिक ऊँचाइयों पर ले जाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

शिंजो आबे की भारत के प्रति अटूट प्रतिबद्धता

दिवंगत जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे को भारत में एक सच्चे मित्र और भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी के सूत्रधार के रूप में याद किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों ने दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की एक नई नींव रखी थी। अकी आबे की इस भारत यात्रा और आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई इस बैठक को उसी गहरी मित्रता और सांस्कृतिक जुड़ाव की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के संवाद दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी समझ और जन-केंद्रित पहलों (People-centric initiatives) को बढ़ावा देने में बेहद मददगार साबित होते हैं।

भविष्य की सहभागिता और वैचारिक आदान-प्रदान

बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने भविष्य में दोनों देशों के सांस्कृतिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और युवाओं के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ाने पर विचार किया। ‘निप्पॉन काइगी’ के अध्यक्ष तोमोहिको तानिगुच ने भी भारत की पारंपरिक जीवनशैली, मूल्यों और वैश्विक शांति के प्रति दृष्टिकोण की सराहना की। आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश करने और सांस्कृतिक बंधनों को और मजबूत करने का संकल्प लिया है।

कूटनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत और जापान विभिन्न मोर्चों पर एक-दूसरे के सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। एक तरफ जहां सरकारें अपने स्तर पर रक्षा और आर्थिक समझौतों को आगे बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की सामाजिक और वैचारिक बैठकें दोनों देशों के समाजों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम करती हैं। अकी आबे की यह यात्रा भारत के प्रति उनके परिवार के अटूट स्नेह और सम्मान को दर्शाती है, जिसे देश भर में बेहद सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।

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