1972 के बंगाल चुनाव का हवाला देकर बीजेपी का कांग्रेस पर वार

वोट चोरी के आरोपों के बीच बीजेपी ने सीपीएम की पुरानी रिपोर्ट शेयर कर कांग्रेस को घेरा, ज्योति बसु के अनुभव का किया जिक्र।

  • बीजेपी ने 1972 के पश्चिम बंगाल चुनाव का मुद्दा उठाकर कांग्रेस पर साधा निशाना।
  • सीपीएम की पुरानी रिपोर्ट का हवाला देकर चुनावी धांधली के आरोप दोहराए।
  • विपक्षी नेताओं द्वारा लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों पर किया गया पलटवार।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 23 अक्तूबर: भारतीय राजनीति में चुनावी प्रक्रिया, वोट चोरी और धांधली के आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ दल पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए इतिहास के पन्नों को पलटना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में बीजेपी ने वर्ष 1972 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी पर करारा हमला बोला है। पार्टी नेताओं ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) की एक पुरानी रिपोर्ट को साझा करते हुए कांग्रेस के पुराने राजनीतिक इतिहास पर सवाल खड़े किए हैं।

सीपीएम की पुरानी रिपोर्ट और कांग्रेस पर धांधली के गंभीर आरोप

बीजेपी की ओर से उठाए गए इस नए राजनीतिक विवाद के केंद्र में साल 1972 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव है। उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों और सीपीएम द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट का जिक्र करते हुए बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए अतीत में चुनावी नियमों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की किस प्रकार धज्जियां उड़ाई थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीपीएम ने 1972 के चुनावों के बाद आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने अपनी संभावित हार को जीत में तब्दील करने के लिए सत्ता का खुलेआम दुरुपयोग किया था। बुनियादी चुनावी प्रक्रियाओं, मतदाताओं के मताधिकार की सुरक्षा, मतपेटियों की संरक्षा और पारदर्शी मतगणना जैसी व्यवस्थाओं को ताक पर रखकर पूरे चुनाव को मजाक या तमाशा बना दिया गया था। बीजेपी का कहना है कि जो दल आज चुनाव प्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, उसका अपना इतिहास चुनावी धांधलियों और सत्ता के दुरुपयोग के उदाहरणों से भरा पड़ा है।

ज्योति बसु के साथ हुई घटना का भी किया गया जिक्र

इस संदर्भ में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मार्क्सवादी पार्टी के दिग्गज नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री रहे स्व. ज्योति बसु का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। बताया गया कि 1972 के उस विवादास्पद चुनाव के दौरान मतगणना प्रक्रिया में कथित तौर पर गड़बड़ी और धक्का-मुक्की का सामना ज्योति बसु को भी करना पड़ा था और उन्हें चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। हालांकि, इसके बावजूद ज्योति बसु की राजनीतिक पकड़ मजबूत रही और वे बाद के वर्षों में लगभग 23 वर्षों तक लगातार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे। बीजेपी इन पुरानी घटनाओं के जरिए यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि कांग्रेस के कार्यकाल में विपक्ष के साथ किस तरह का बर्ताव होता था।

विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के नैरेटिव पर बीजेपी का पलटवार

हाल के दिनों में विपक्षी दलों द्वारा जिस प्रकार ‘वोट चोरी’ और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं, बीजेपी ने उसे पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और निराधार बताया है। बीजेपी का तर्क है कि जो लोग खुद लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के इतिहास से जुड़े रहे हैं, वे आज अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख इस तरह के बेबुनियाद नैरेटिव गढ़ रहे हैं। विपक्षी नेताओं के चुनाव आयोग विरोधी अभियानों और बयानों पर सवाल उठाते हुए सत्तारूढ़ दल का कहना है कि जनता अब सब जानती है और इस तरह के पुराने कारनामों को छिपाने के लिए फैलाए जा रहे भ्रम काम नहीं आएंगे।

निष्कर्ष और राजनीतिक निहितार्थ

1972 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मुद्दों को मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में खींचकर लाना यह दर्शाता है कि आने वाले चुनावों से पहले वैचारिक और ऐतिहासिक मुद्दों पर वार-पलटवार का दौर और अधिक तेज होने वाला है। एक तरफ जहां विपक्ष सरकार को घेरने के नए-नए हथियार तलाश रहा है, वहीं सत्ता पक्ष भी इतिहास के पन्नों से पुराने उदाहरण निकालकर विपक्ष को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। यह सियासी जंग आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति के तापमान को और बढ़ाने का काम करेगी।

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