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विचार
बिना सनातन संस्कृति के भारत की कल्पना भी नहीं की जा सकती
✍🏻 पार्थसारथि थपलियाल
वर्तमान में अलग अलग तौर तरीकों से सनातन संस्कृति के विरुद्ध तरह तरह के दुष्चक्र चलाए जा रहे हैं। दुष्चक्र के ये अभियान वे लोग चलाते हैं जिन्होंने भारत को गहराई से नहीं जाना अथवा वे भारतीयता के विरोधी हैं। ऐसे लोग…
भारतीय समावेशी समाज पर आधुनिकता की काली छाया
✍🏻 पार्थसारथि थपलियाल
माना कि परिवर्तन अवश्यंभावी है, नदी के पानी में नहाते हुए स्पर्श होते ही पानी वही नहीं रह जाता जिसने अभी स्पर्श किया था। यह प्रवाह का परिवर्तन है। तालाब के पानी में ऐसा परिवर्तन नहीं होता। एक परिवर्तन बाँध वाले पानी…
ग्रे डिवोर्स: जेनरेशन एक्स में क्यों बढ़ रहे हैं देर उम्र के तलाक?
पूनम शर्मा
अक्सर तलाक को युवा या मध्यम आयु वर्ग की समस्या माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा टूट रही है। आजकल "ग्रे डिवोर्स"—यानी 50 साल से अधिक उम्र के लोगों के बीच होने वाले तलाक—का चलन तेजी से बढ़ रहा है, खासकर जेनरेशन एक्स (1965–1980…
उच्च न्यायपालिका में हिंदी के लिए बंद दरवाजा तोड़ना पड़ेगा
डॉ मोतीलाल गुप्ता 'आदित्य'
राष्ट्रपति के आदेश 1960 में यह कहा गया था कि उचित समय आने पर सर्वोच्च न्यायालय की भाषा अंततः हिंदी होगी। इसी प्रकार उच्च न्यायालय के लिए भी कहा गया था कि उनकी भाषा उचित समय आने पर हिंदी अथवा राज्य की भाषा होगी।…
नई दिल्ली में ब्रिक्स का संदेश: भारत की वैश्विक भूमिका के लिए बढ़े अवसर
नव ठाकुरीया
नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को ‘मज़बूती, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) थीम के तहत आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नेताओं ने वैश्विक…
सांस्कृतिक मोर्चे पर क्यों पिछड़ गई भाजपा?
प्रसिद्ध लेखक और विचारक डॉ. भारत गुप्त ने भाजपा सरकार की सांस्कृतिक नीतियों और बौद्धिक संस्थानों की नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उनके अनुसार, सड़कों और बुनियादी ढांचे के विकास के बावजूद भाजपा सांस्कृतिक मोर्चे और वैचारिक…
भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रासंगिकता: ब्रिक्स 2026
डॉ. प्रियदर्शिनी पुरोहित
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और वैश्विक विखंडन से जूझ रही है। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता…
जवानी अंगड़ाई ले रही है, बूढ़ी सरकार उबासियाँ
अनिल त्यागी
जंतर-मंतर पर Gen Z ने कुछ दिन शोर मचाया। शोर अब कम हो गया है, लेकिन सरकार के भीतर उसकी गूंज अभी बाकी है। फर्क इतना है कि बाहर नारे लग रहे थे, अंदर सवाल उठ रहे हैं।
प्रधानमंत्री की ताकत पर सवाल उठाने की हिम्मत न भाजपा में है,…
डोभाल बनाम जयशंकर : दो रानियों की शतरंज
अनिल त्यागी
यह एक अनोखा खेल है। चौंसठ खानों के इस पट पर केवल सफ़ेद मोहरे सजे हैं। स्वाभाविक है, एक राजा साहब भी हैं जो बाकी सबसे ज़रा ऊँचे और कद्दावर दिखते हैं। पर इस बोर्ड की असली अजूबाई यह है कि यहाँ एक नहीं, दो-दो रानियाँ (वज़ीर) हैं।…
अमेरिकी में संघ प्रमुख के संबोधन का निहितार्थ
निशिकांत ठाकुर
भारत का इतिहास बताता है कि आर्य, यवन, शक, गुर्जर, जट्ट, हूण, अरब, तुर्क आदि कितनी ही जातियां समय-समय पर यहां आईं। उन्होंने पहले अपना अलग शासक या उपनिवेशवादी समाज कायम कर यहां की राष्ट्रीयता लेनी चाही; लेकिन जब शासन हाथ से…