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विचार
क्या पीएफआई पर केवल भाजपा की जिम्मेदारी?
देश में पीएफआई के कारनामों को उजागर होते है केंद्र की भाजपा सरकार ने इस पर पूरी तरह से प्रतिंबन्ध लगा दिया है।
बीजेपी शासित राज्यों ने भी PFI पर अधिसूचना जारी करके इनके कार्यालय बंद करने और इनकी गतिविधियों को गैरकानूनी घोषित कर दिया। लेकिन…
नवरात्रों का वैज्ञानिक महत्त्व
डॉ. ओमप्रकाश पांडेय
भारतीय अवधारणा में हिरण्यगर्भ जिसे पाश्चात्य विज्ञान बिग बैंग के रूप में देखता है, से अस्तित्व में आए इस दृष्यादृष्य जगत के सभी प्रपंच चाहे वह जड़ हों या चेतन, सभी निर्विवाद रूप से शक्ति के ही परिणाम हैं। हम सभी का…
गुस्ताखी माफ हरियाणा : अरावली पहाड़ों को बचाने की आड़ में , गुड़गांव में हजारों करोड़ के घोटाले की…
गुस्ताखी माफ हरियाणा : अरावली पहाड़ों को बचाने की आड़ में , गुड़गांव में हजारों करोड़ के घोटाले की आशंका
बच्चे की असीम ख़ुशी और रतन टाटा !!
मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं, ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं, तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।
नवरात्रि आते ही वामपंथी स्त्री विरोधी एजेंडा का चालू होना: क्या यह वामपंथ द्वारा स्त्रियों को औरत…
हिन्दुओं के सबसे पावन एवं स्त्रियों की शक्ति के पर्व अर्थात नवरात्रि के आते ही फेमिनिस्टों एवं वामपंथियों का एजेंडा आरम्भ हो जाता है और कहा जाने लगता है कि पूरे साल मारपीट तो वहीं इन नौ दिनों में देवी बनाकर रखना? यह एक ऐसा एजेंडा है, जिसे…
इंग्लैंड में हिन्दुओं के मंदिरों पर हमला।।
न इंग्लैंड मे भाजपा हैं, न भक्त और न ही संघ या संघी सरकार लेकिन फिर भी वहां हिन्दुओं और हिन्दू मन्दिरों को निशाना बनाया जा था है और साथ मे कहा जा रहा हैं कि हम हिन्दुओं को नहीं रहने देंगे।
25 सितम्बर/जन्म-दिवस”: एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय
सुविधाओं में पलकर कोई भी सफलता पा सकता है; पर अभावों के बीच रहकर शिखरों को छूना बहुत कठिन है। 25सितम्बर,1996 में जयपुर से अजमेर मार्ग पर स्थित ग्राम धनकिया में अपने नाना पण्डित चुन्नीलाल शुक्ल के घर जन्मे दीनदयाल उपाध्याय जी ऐसी ही विभूति…
गुस्ताखी माफ़ हरियाणा: क्या मोदी और हूडा मिले हुए है -या वे जाने या राम जाने
गुस्ताखी माफ़ हरियाणा: क्या मोदी और हूडा मिले हुए है -या वे जाने या राम जाने
‘स्टैंड अप कमेडी’ के ‘सोशल सर्जन’ थे राजू श्रीवास्तव
अजय बोकिल
हमारे देश में काॅमेडी की परंपरा पुरानी होते हुए भी ‘स्टैंड अप काॅमेडी’ कला और इसे परफार्म करने वाले कलाकारों का कोई शास्त्रीय आकलन शायद ही हुआ है। कला जगत में उनकी स्थिति स्टेज के ट्रांसजेंडर कलाकारों जैसी रही है। न थियेटर में न…