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विचार

प्रकृति के साथ खिलवाड़- मनुष्य और मशीनों का दखल बन रहा है तबाही का कारण

अनंत मित्तल। धौलीगंगा में हिमनद की झील फूटने से प्रचंड बाढ़ आने जैसे खौफनाक मंजर का उत्तराखंड में यों तो एक हजार साल पुराना भूगर्भीय प्रमाण है मगर सन 1894 में अलकनंदा की बाढ़ से उसका लिखित सबूत भी उपलब्ध है. उसके बाद से हिमालय की अलकनंदा और…

बंगाल में हिंदी भाषी वोटरों को सहेंजे रखना ममता के लिए चुनौती

सुनील अग्रवाल। भाजपा के तेजी से बढ़ते प्रभाव से घबराई ममता बनर्जी के लिए हिंदी भाषी वोटरों को रिझाने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ सकता है। आलम यह है कि ममता खुद का भवानीपुर विधानसभा सीट सुरक्षित रख पाएं, इसमें भी संशय बना हुआ है।…

विरोधियों की विदाई के हीरो बने मोदी

अजय सेतिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ अपना हुलिया नहीं बदला , मिजाज भी बदल लिया है | पिछले दो दिन से राज्यसभा में बदले बदले से नजर आए | सोमवार को जब राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देते हुए वह कृषि कानूनों की वकालत कर रहे थे , तो…

मशहूर शायर निदा फाजली की पुण्यतिथि पर याद कर रहे हैं जयराम शुक्ल

जयराम शुक्ल निदा साहब को इस दुनिया से रुखसत हुए आज के दिन पाँच साल पूरे हो गए। निदा साहब गजल और शायरी को कोठे की रूमानियत से निकालकर खेत, खलिहान में गेहूं, धान, और आंगन में तुलसी के बिरवा की तरह रोप गये। उनके आदर्श मीरोगालिब नहीं बल्कि…

कैबिनेट विस्तार को लेकर आंख-मिचौली का खेल जारी

सुनील अग्रवाल  बिहार में नीतीश कैबिनेट विस्तार को लेकर  आंख-मिचौली का खेल बदस्तूर जारी है। आखिर मंत्रिमंडल का विस्तार कब तक होगा, कोई माकूल जवाब दे पाने की स्थिति में नहीं है। सत्ता पक्ष की ओर से महज इतना भर कहा जा रहा है कि जल्द हीं हो…

लाल किले पर केसरिया

अजय सेतिया। गणतंत्र दिवस पर जो कुछ दिल्ली में हुआ , वह होना ही था, इसके संकेत शुरू से मिल रहे थे । 26 नवंबर को हरियाणा से गुजरते हुए पंजाब के किसानों ने पुलिस के बैरिकेड तोडते हुए जो तांडव दिखाया था , वह संकेत काफी था । इससे पहले जिस तरह…

रिहाना और राहुल की समानता

अजय सेतिया। आंदोलनकारी किसान अब थकने शुरू हो गए हैं। हाईवे और इंटरनेट बंद होने से जनता परेशान है , तो 26 जनवरी के बाद यूपी, हरियाणा सरकारों की सख्ती से किसानों का हगना मूतना भी मुश्किल हो गया है | उन्हें खुले में शौच करना पद रहा है |…

हर एक आंदोलन कुछ बयां करता है

सुनील अग्रवाल।  भारत में हर एक आन्दोलन कुछ बयां करता है। देश में कुछ ऐसे विकृत मानसिकतावादी तत्व हावी होते जा रहे हैं,जिनका मकसद देश में अराजकता फैलाना रहा है। सीएए के नाम पर आन्दोलन का हश्र क्या हुआ। आन्दोलन के नाम पर दिल्ली को दंगे की…

संकट के दर्द से सबक वाला, चंगा मन की दवा है; निर्मला का निर्मल बजट

गोविन्द मालू मन चंगा तो कठौती में गंगा वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए केंद्रीय बजट ने स्वास्थ्य और सेहत को अपनी मूल आत्मा बनाकर भारत के नागरिकों की सुरक्षा को शीर्ष पर रखा है। स्वास्थ्य, यातायात, सड़क, पर्यावरण और कृषि को इस बजट नें…