Browsing Category
जीजीएन विशेष
कोरे कागज पर रंग भरतीं स्त्रियां
*संजय स्वतंत्र
भारतीय स्त्रियों ने सदियों से पीड़ा झेली है। उनके संघर्ष की अनंत गाथा है। पुरुषों की आधी दुनिया है वह। फिर भी वह हाशिए पर है, तो इसके लिए जिम्मेदार पुरुष है। पितृसत्ता ने स्त्रियों के जीवन को कोरा कागज बना दिया है। नतीजा अब…
क्या यही सनातन धर्म है ?
*शिवानन्द तिवारी
किसी का सर काटने के लिए इनाम की घोषणा करना क्या सनातन धर्म है ! धार्मिक सम्मेलनों में किसी समुदाय विशेष के जनसंहार करने की अपील करना क्या सनातन धर्म का हिस्सा है.
याद होगा, महाभारत काल के सनातनी गुरू द्रोणाचार्य ने गुरु…
सुहागन की बिंदी…
*पवन कुमार सरजी
बाहर फेरीवाला आया हुआ था, कई तरह का सामान लेकर। बिंदिया, कांच की चूड़ियां, रबर बैंड, हेयर बैंड, कंघी, काँच और भी बहुत सारे सामान थे । आस पड़ोस की औरतें उसे घेर कर खड़ी हुई थी ।
काफी देर तक बाबा गेट पर अपनी लाठी टेककर…
मिर्च-मसाला- संसद के विशेष सत्र का छुपा एजेंडा क्या है?
त्रिदीब रमण
’उतनी बारूद अपने अंदर बचा कर रखना
जितनी रखती हैं माचिस की तिल्लियां
अंधेरों को मालूम हो तेरे जलने का हुनर’
शह-मात की सियासी बिसात पर आप इसे केंद्र नीत भाजपा सरकार का एक बेहद सुविचारित दांव मान सकते हैं, अब यह महज़ इत्तफाक…
राष्ट्रप्रथम- ग़लत फहमी के नैरेटिव की पाठशाला
पार्थसारथि थपलियाल
पापी पेट क्या नही करवाता इसका प्रबल उदाहरण है पत्रकारिता। 30-35 साल पहले झूठ का सच गड़ने वाले न समाचार पत्र हुआ करते थे न रेडियो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। आकाशवाणी विवादित विषयों की बजाय सामाजिक उत्थान, विकासात्मक और…
सार्वजनिक जीवन के वैचारिक बौने लोग
पार्थसारथि थपलियाल
भारत में मर्यादाओं की रक्षा समाज स्वयं करता आया है। लोक संस्कार, लोक व्यवहार, लोक अभिव्यक्ति और प्रदर्शन को लोक-मर्यादा और लोक-लाज नियंत्रित करते रहे। मर्यादाविहीन आचरण करने वाले स्वयं ही खलनायक बन जाते हैं।
लोक…
”ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन…”
*डा. प्रकाश हिन्दुस्तानी
जब भी देश-प्रेम की बात होती है तब शहादत या बलिदान की बात पहले होती है, या फिर यह बात होती है कि मेरा देश ही सर्वश्रेष्ठ है। सभी को अपना मुल्क ही सबसे अच्छा लगता है। लेकिन आज मैं जिस गाने की बात…
मिर्च-मसाला- स्वच्छता आंदोलन के सबसे बड़े पुरोधा को गमगीन विदाई!
त्रिदीब रमण
’इतना मलाल तो सूरज को भी हो रहा है तेरे जाने से
तू कब पीछे रहा है बुझे दिलों में चिराग जलाने से’
सुलभ स्वच्छता आंदोलन के पुरोधा पद्म भूषण डॉ. विन्देश्वर पाठक का यूं अचानक चले जाना, स्तब्ध कर देने वाला है। बिहार के एक छोटे…
वा रे पंकज तिरपाठी भिया,,ग़दर तो आपने मचा दिया !!
*डॉ.प्रकाश हिन्दुस्तानी
सलंग दो फ़िल्में देखीं। दोनों पुरानी फिल्मों की कड़ियाँ थीं। OMG 2 और ग़दर 2 . ग़दर 2001 में आई थी। OMG 2012 में। दोनों फिल्मों का जॉनर अलग है। दोनों को परिवार के साथ देखा जा सकता है। दोनों फिल्मों की अपनी…
“जिन्दगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मकाम”
*डॉ प्रकाश हिन्दुस्तानी
करीब आधी सदी पहले 1974 में फिल्म आई थी -'आपकी कसम'। जिसका यह कालजयी गाना 'जिन्दगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मकाम' आज भी अपने दार्शनिक बोल, मधुर संगीत और स्वर के लिए याद किया जाता है। जब किशोर…