शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स क्रैश
कमजोर वैश्विक संकेतों और बिकवाली के दबाव से निवेशकों के डूबे अरबों रुपये, सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी कमजोरी दर्ज।
- भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली के चलते आज सेंसेक्स 778 अंक लुढ़ककर 74,003 के स्तर पर बंद हुआ।
- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी करीब 280 अंकों की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ है।
- वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेतों और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली से निवेशकों को बड़ा झटका लगा है।
समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 15 सितंबर: भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन निवेशकों के लिए काफी निराशाजनक रहा। हफ्ते के शुरुआती कारोबारी सत्रों के दौरान ही बाजार पर बिकवाली का ऐसा दबाव देखने को मिला कि प्रमुख सूचकांक धड़ाम हो गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) कारोबार के अंत में 778 अंकों की भारी गिरावट के साथ 74,003 के स्तर पर बंद हुआ। इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी करीब 280 अंकों का गोता लगाकर काफी नीचे बंद हुआ। बाजार में आई इस अचानक और तेज गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई है और दलाल स्ट्रीट पर दिनभर उदास माहौल बना रहा।
गिरावट के पीछे प्रमुख वैश्विक और घरेलू कारण
शेयर बाजार जानकारों के अनुसार, इस भारी गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रिय और घरेलू कारण जिम्मेदार रहे हैं। अमेरिकी बाजारों में सुस्ती, एशियाई बाजारों के कमजोर रुझान और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजारों से लगातार पैसा निकाले जाने के कारण लिक्विडिटी पर भी असर पड़ा है। घरेलू स्तर पर भी कई कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर अनिश्चितता और उच्च मूल्यांकन (Valuation) के चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली करना बेहतर समझा, जिससे बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हो गया।
सेक्टरवार प्रदर्शन और निवेशकों को झटका
आज के इस भारी भूचाल में बैंकिंग, ऑटो, आईटी, मेटल और रियल्टी समेत लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में बिकवाली हावी रही। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में आई कमजोरी ने सूचकांकों को सबसे ज्यादा नीचे खींचने का काम किया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जोरदार बिकवाली देखने को मिली, जिससे खुदरा निवेशकों (Retail Investors) को बड़ा झटका लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक अनिश्चितताएं और FIIs की बिकवाली का दौर थमता नहीं है, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव का यह सिलसिला जारी रह सकता है।
आगे की रणनीति और बाजार का दृष्टिकोण
बाजार के मौजूदा रुझानों को देखते हुए वित्तीय सलाहकारों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे घबराहट में आकर बिकوالी (Panic Selling) न करें। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय चुनिंदा और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में क्वालिटी खरीदारी करने का हो सकता है। हालांकि, तकनीकी रूप से बाजार अभी दबाव में है, इसलिए ट्रेडर्स को स्टॉप लॉस के साथ ही काम करना चाहिए। आने वाले दिनों में कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर बाजार की चाल पूरी तरह निर्भर करेगी।
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