शांति की मजबूत आवाज बन रहा भारत: राधाकृष्णन

उपराष्ट्रपति का बड़ा बयान, कहा- दुनिया के मौजूदा संकटों के दौर में संवाद और कूटनीति ही समस्याओं के समाधान का एकमात्र रास्ता है।

  • उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि भारत आज वैश्विक मंच पर शांति और स्थिरता की एक मजबूत आवाज के रूप में उभर रहा है।
  • उन्होंने वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए कूटनीति, संवाद और मानवीय मूल्यों के संरक्षण को सबसे जरूरी बताया है।
  • भारत की प्राचीन संस्कृति ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के संदेश के साथ अंतर्राष्ट्रीय शांति प्रयासों में निरंतर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

नई दिल्ली, 15 सितंबर: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के इस दौर में भारत की वैश्विक भूमिका लगातार और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसी संदर्भ में एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि भारत आज वैश्विक मंच पर शांति, न्याय और स्थिरता की एक सबसे सशक्त और विश्वसनीय आवाज के रूप में स्थापित हो चुका है। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों और युद्धों के बीच भारत ने हमेशा से तटस्थता बनाए रखते हुए शांति का संदेश दिया है। देश की यह विदेश नीति केवल उसके अपने राष्ट्रीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता और वैश्विक कल्याण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

संवाद और कूटनीति के जरिए शांति की वकालत

आज जब दुनिया के कई देश हथियारों की होड़ और आपसी तनाव से जूझ रहे हैं, तब भारत लगातार यह बात दोहराता आ रहा है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत ने हमेशा से बातचीत की मेज पर बैठकर आपसी मतभेदों को दूर करने की संस्कृति का समर्थन किया है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ (पूरा विश्व एक परिवार है) की हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति और दर्शन आज के वैश्वीकृत युग में और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। वैश्विक मंचों पर जब भी शांति की बात आती है, दुनिया भर की निगाहें भारत के नेतृत्व और उसकी निष्पक्ष मध्यस्थता पर टिकी होती हैं।

बहुपक्षीय मंचों पर भारत का बढ़ता प्रभाव

हाल के वर्षों में जी-20, संयुक्त राष्ट्र और अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं को जिस मुखरता से रखा है, उससे देश का कद काफी ऊंचा हुआ है। भारत ने खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर हमेशा दो टूक और स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किए बिना वैश्विक स्तर पर सहकारिता और आपसी विश्वास को बढ़ावा देने में विश्वास रखता है। भारत की यह नीति इसे दुनिया भर के देशों के लिए एक मार्गदर्शक और भरोसेमंद साझीदार बनाती है।

विकसित भारत और वैश्विक शांति का संकल्प

भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर हमारा देश केवल आर्थिक और तकनीकी मोर्चे पर ही आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि वह वैश्विक शांति और सुरक्षा के सिद्धांतों को भी मजबूती दे रहा है। जब देश आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और मजबूत होता है, तो उसकी शांति की आवाज का वजन भी अंतरराष्ट्रीय पटल पर बढ़ जाता है। भारत का यह बढ़ता प्रभाव इस बात का प्रतीक है कि आने वाले समय में दुनिया भर में शांति स्थापना के हर प्रयास में भारत की भूमिका केंद्रीय और निर्णायक होगी।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.