देशभर में धूमधाम से मनाया गया जन्मोत्सव

मथुरा से लेकर इस्कॉन मंदिरों तक गूंजे कन्हैया के जयकारे, मध्यरात्रि में भव्यता के साथ संपन्न हुआ लड्डू गोपाल का प्रकटोत्सव।

  • देश भर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व अत्यंत उत्साह, श्रद्धा और धार्मिक विधि-विधान के साथ मनाया जा रहा है।
  • मथुरा, वृंदावन, दिल्ली और इस्कॉन मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर विशेष कार्यक्रमों और झांकियों का आयोजन किया गया है।
  • मध्यरात्रि (निशीथ काल) में लड्डू गोपाल के जन्म के बाद पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई।

 

नई दिल्ली/मथुरा, 5 सितंबर: सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म के सबसे बड़े पावन पर्वों में शुमार श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव देश भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाने वाले योगेश्वर श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। इस वर्ष जन्माष्टमी का यह महापर्व विशेष और दुर्लभ संयोगों के बीच आया है, जिसके चलते मंदिरों से लेकर घरों तक में विशेष सजावट और उत्सव का माहौल है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक केंद्रों जैसे मथुरा, वृंदावन, गोकुल के साथ-साथ राजधानी दिल्ली और देश के तमाम हिस्सों स्थित इस्कॉन मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है।

मथुरा और वृंदावन में उमड़ा आस्था का जनसैलाब

भगवान कृष्ण की क्रीड़ास्थली मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर भव्य आयोजन किए गए हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और द्वारकाधीश मंदिर के साथ-साथ प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के लिए भारी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे हैं। मंदिरों को भव्य फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। मध्यरात्रि ठीक 12 बजते ही जैसे ही कन्हैया के जन्म की घोषणा हुई, पूरा प्रांगण ‘नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों और शंखनाद से गूंज उठा। मंदिरों में कान्हा के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं।

इस्कॉन मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान

राजधानी दिल्ली सहित देश और दुनिया भर के तमाम इस्कॉन (ISKCON) मंदिरों में भी जन्माष्टमी का पर्व पूरी भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। इस्कॉन मंदिरों में भव्य अभिषेक, हरिनाम संकीर्तन, श्रीमद्भागवत कथा और मध्यरात्रि की विशेष आरती का आयोजन किया गया। इस दौरान भक्तों ने उपवास रखकर भगवान का स्मरण किया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और महामंत्र ‘हरे कृष्ण हरे राम’ के संकीर्तन से पूरा वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया है। कई स्थानों पर आज यानी 5 सितंबर को भी नंदोत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची हुई है।

लड्डू गोपाल का अभिषेक और पूजन विधि

जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर घरों और मंदिरों में स्थापित बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) का विधि-विधान से श्रृंगार किया गया। रात्रि के शुभ मुहूर्त में ठाकुर जी को गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके बाद उन्हें नए और सुंदर रेशमी वस्त्र, मुकुट, बांसुरी और मोरपंख से अलंकृत कर पालने में विराजमान किया गया। श्रद्धालुओं ने कान्हा को माखन-मिश्री, धनिया की पंजीरी और विभिन्न प्रकार के मिष्ठान्न व फलों का भोग लगाया। इस पर्व ने एक बार फिर संपूर्ण देश को प्रेम, भक्ति और भाईचारे के रंग में रंग दिया है।

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