- सुप्रीम कोर्ट के जज उज्जल भुइयां ने न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए
- कहा- कोलेजियम के हालिया प्रस्तावों में कारण नहीं दिए गए, नागरिकों को जानने का अधिकार है
- न्यायपालिका में कारण न बताने से अवांछित उम्मीदवारों के प्रवेश की आशंका बढ़ती है
- पूर्व में कोलेजियम प्रस्तावों में उचित तर्क दिए जाते थे, जिसकी सराहना भी की
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 2 अगस्त : सुप्रीम कोर्ट के जज उज्जल भुइयां ने न्यायिक नियुक्तियों के कोलेजियम प्रस्तावों में पारदर्शिता की कमी को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन कोलेजियम प्रस्तावों में नियुक्तियों के लिए कोई कारण नहीं दिए गए, जबकि पहले कुछ न कुछ तर्क जरूर प्रस्तुत किए जाते थे। जस्टिस भुइयां ने यह टिप्पणी एक थिंक-टैंक ‘विदि’ की रिपोर्ट के विमोचन कार्यक्रम के दौरान की।
उन्होंने कहा कि नागरिकों का अधिकार है कि वे जानें कि अदालतों में क्या हो रहा है, उनके न्यायाधीश कौन हैं और किस तरह के निर्णय दिए गए हैं। न्यायपालिका में पारदर्शिता न होने से न सिर्फ योग्य जजों को नुकसान होता है, बल्कि इससे अवांछित उम्मीदवार भी न्यायिक व्यवस्था में प्रवेश पा सकते हैं।
जस्टिस भुइयां ने पूर्व सीजेआई यूयू ललित के कार्यकाल के एक प्रस्ताव का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय उचित कारण और तर्क दिए गए थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के जज के लिए सौरभ किर्पाल की नियुक्ति की सिफारिश का भी उल्लेख किया और कहा कि उसमें दिए गए कारण काफी मजबूत और संतोषजनक थे, हालांकि वह मामला तीन साल से लंबित है।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.