Browsing Category

जीजीएन विशेष

श्राद्ध और पितृपक्ष का वैज्ञानिक महत्व

डॉ. ओमप्रकाश पांडे श्राद्ध कर्म श्रद्धा का विषय है। यह पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम है। श्राद्ध आत्मा के गमन जिसे संस्कृत में प्रैति कहते हैं, से जुड़ा हुआ है। प्रैति ही बाद में बोलचाल में प्रेत बन गया। यह कोई…

वो दो व्यक्ति …जिन्होंने भगत सिंह के खिलाफ दी गवाही….

भगत सिंह के खिलाफ विरुद्ध गवाही देने वाले दो व्यक्ति कौन थे । जब दिल्ली में भगत सिंह पर अंग्रेजों की अदालत में असेंबली में बम फेंकने का मुकद्दमा चला तो भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त के खिलाफ शोभा सिंह ने गवाही दी और दूसरा गवाह था…

सामाजिक न्याय की लड़ाई अभी बहुत लंबी है …

*शिवानन्द तिवारी सामाजिक न्याय की लड़ाई अभी बहुत लंबी है. आज जब संसद में एक कविता का पाठ करने पर सार्वजनिक रूप से सर काट लेने, जीभ खिंच लेने, हत्या कर देने जैसी धमकी दी जा रही है. आज के दिन भी निडर होकर ऐसी धमकी दी जा सकती है यही प्रमाण है…

अमेरिका और पश्चिमी देशों का दोहरा मापदंड

-बलबीर पुंज भारत-कनाडा संबंध इस समय बहुत तनाव में है। इसका कारण कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा खालिस्तानी चरमपंथी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में मोदी सरकार की संलिप्तता का मनगढ़ंत आरोप और भारत में दम तोड़ चुके सिख अलगाववाद की आग…

शिवराज की उपेक्षा और अपमान की असली वजह ?

अरुण दीक्षित 25 सितम्बर को भोपाल यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सार्वजनिक उपेक्षा के बाद यह सवाल सबकी जुबान पर है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ?क्यों प्रधानमंत्री ने लाखों कार्यकर्ताओं के सामने न…

Birth Anniversary: स्वतंत्रता प्रत्येक मानव का अधिकार है, हम इसे छीन कर लेंगे यही मेरा प्रण है- शहीद…

स्निग्धा श्रीवास्तव समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 28सितंबर। शहीद भगत सिंह भारत के ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे जिन्होंने देश के युवाओं में भारत मां के लिए मर-मिटने की प्रेरणा जागृत की। भगतसिंह ने अपने बहुत ही छोटे से जीवन में…

बेचारे मनोज झा की मज़बूरी, राज्य सभा सीट के लिए कुछ भी, सब ज़रूरी …

रवि प्रताप दूबे राष्ट्रीय जनता दल से राज्यसभा सांसद मनोज झा ने सदन में जब महिला आरक्षण पर भाषण दिया तो उन्होंने एक कविता पढ़ी जो "ठाकुर" पर निशाना साधती है। 1- अव्वल तो मुझे मनोज झा की तरह बोलने वाले लोग कभी पसंद नहीं आते, क्योंकि उनकी…

भारत में देश द्रोहियों से सावधान…

*भुवनेश्वर पारीक हिंदू भारत मे न दलित खतरे में हैं , न मुसलमान खतरे में हैं और न ही संविधान खतरे में है ! और हां कोई डर भी नहीं रहा ! कोई डरा भी नहीं रहा ! खतरे में वे हैं जिन्होंने आजादी मिलने के बाद कईं दशकों तक इस देश को लूटा है ।…

बहुत देर में पहचाना गया वहीदा रहमान को

राकेश अचल देश की ख्यातिनाम अभिनेत्री वहीदा रहमान को दादा साहब फाल्के पुरस्कार देकर भारतीय फिल्म जगत ने अपने आपको कृतघ्न होने से बचा लिया । पूरे दो दशक के बाद इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए किसी फिल्म अभिनेत्री को चुना गया है। वहीदा रहमान के…