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जीजीएन विशेष

क्या है दिल्ली में भाजपा का ’मास्टर स्ट्रोक’

त्रिदीब रमण।  ’बात इतनी सी थी मगर बता नहीं पाए गैरों के आगे तुझे गले लगा नहीं पाए शहर में इन दिनों काफिरों की आवाज़ाही है बहुत क्यों तुम्हें खुदा अपना बना नहीं पाए’ सवाल यह लाख टके का है कि क्या केजरीवाल की दिल्ली उनकी मुट्ठियों से…

तस्मै श्रीगुरवे नमः

आज गुरुपूर्णिमा है। सनातन संस्कृति के आदि ग्रंथों के सृजक महर्षि वेदव्यास जी का जन्मदिन है। वेदों और उपनिषदों के संकलनकर्ता, पुराणों और महाभारत के रचयिता जिन्होंने मानवता को सुसंस्कृत होने का ज्ञान दिया ऐसे गुरु को नमन है।…

शिंदे की राह क्यों आसान नहीं

’इन चुप्पियों के हाथ कैसे रंगे हैं खून से क्षत-विक्षत शब्द पड़े हैं जो हर तरफ मौन से’    एकनाथ शिंदे के सिर अभी-अभी तो सिरमौर का ताज सजा है, गाजे-बाजों का शोर भी हर  ओर गुंजायमान है, फिर भी क्या बात है कि चुप सन्नाटों की बतकहियां…

 मंथन- पंचनद : दैशिक शास्त्र (12)

पार्थसारथि थपलियाल विचार मंथन का उद्देश्य होता है हमें जो मार्ग पकड़ना है उस पर चलने से पहले हम विवेकपूर्ण चिंतन कर उस विचार को मथ लें ताकि यात्रा सुनियोजित तरीके से सफल हो। इस प्रकार का मंथन इस सत्र में हुआ। अगला सत्र दैशिक शास्त्र पर…

मंथन- पंचनद : विमर्श का सांगोपांग मंथन (11)

पार्थसारथि थपलियाल 15 जून को जब सुबह सुबह की परिवह पवनें चलने लगी थी। (परिवह, आठ प्रकार की पवनों में से एक)। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अतिथि गृह के पीछे मखमली दूब में स्वास्थ्य के प्रति सावधान प्रतिभागी अपने अपने आसान…

मंथन- धर्म की अवधारणा-आचार: प्रथमो धर्म:

पार्थसारथि थपलियाल लोग अक्सर धर्म की बात तो करते हैं लेकिन धर्म को जानते नही हैं। कोई मंदिर जाने को धर्म कह देगा, कोई तिलक लगाने को धर्म कह देगा। कुछ लोग रीति रिवाज को तो कोई परंपराओं को धर्म मान लेता है। यह सब अज्ञानताएं हैं। भारतीय…

मध्य प्रदेश डायरी: रवीन्द्र जैन

रवीन्द्र जैन आईपीएस की 41 सम्पत्तियां! भोपाल में मंत्रालय की तीसरी मंजिल से खबर निकलकर आ रही है कि गृह विभाग आजकल मप्र केडर के आईपीएस अधिकारियों की अचल सम्पत्तियों की सूची तैयार कर  रहा है। विभाग यह जानकर हैरान है कि एक अतिरिक्त…

 कल्पना के उमड़ते घुमड़ते बादल

पार्थसारथि थपलियाल आज मुझे अपनी लिखी जा रही सीरीज को आगे बढ़ाना था लेकिन मौसम ने अंगड़ाई ली, तन्हाई ने पंख दिए आसमान में बादल थे। ये बादल ले उड़े अपने साथ ऊंचाई पर। ये बादल वही थे जो वर्षों पहले रामटेक आश्रम में महाकवि कालिदास ने देखे…

पाथेय- हम कौन थे? क्या हो गए और क्या होंगेअभी

पार्थसारथि थपलियाल कुरुक्षेत्र में द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने दुनिया का सर्वोत्तम ज्ञान सारथि रूप में किंकर्तव्यविमूढ़ रथवान युद्धवीर अर्जुन को दिया था। इस ज्ञान को गीता के नाम से जाना जाता है जो महाभारत के भीष्मपर्व का हिस्सा है। उसी…

मंथन- पंचनद : विमर्श का सांगोपांग मंथन (6) – सु-फलता और सफलता देती कार्य योजनाएं

पार्थसारथि थपलियाल 14 जून को भोजनान्तर काल के एक सत्र में पंचनद शोध संस्थान के विभिन्न विभागों के प्रमुखों से उनके विभागों से प्रतिवेदन प्राप्त करने का था। सुबह के एक सत्र में पंचनद के निदेशक डॉ. कृष्ण चंद्र पांडेय ने बताया था कि पंचनद…